Maa Durga ka Priya mantra

 

मां दुर्गा का प्रिय मंत्र




ॐ जयन्ती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी । 

दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते II


यह श्लोक मां दुर्गा के विभिन्न रूपों की स्तुति करता है। इसमें देवी के विभिन्न नामों और उनके अलग-अलग स्वरूपों का उल्लेख है, जो उनकी दिव्य शक्तियों और उनके द्वारा निभाई गई भूमिकाओं को दर्शाता है


ॐ -  प्रणव मंत्र है, जो परम सत्य का प्रतिनिधित्व करता है  यह ब्रह्मांड की आद्य ध्वनि है

 जयन्ती (विजयी देवी) जो सदा विजयी होती हैं और बुराई को हराती हैं।

 मंगला (मंगलमयी देवी) जो शुभ और मंगलमय होती हैं।

काली (उग्र रूप  ) जो काल (समय) और परिवर्तन का प्रतिनिधित्व करती हैं, और उग्र रूप में हैं।

भद्रकाली (काली का शुभकारी स्वरूप) जो अपने उग्र रूप में भी कल्याणकारी और संरक्षक हैं।

कपालिनी (कपाल धारण करने वाली ) जो खोपड़ी धारण करती हैं, जो बुराई के विनाश का प्रतीक है।

दुर्गा - अजेय और अविजित देवी, जो अपने भक्तों की रक्षा करती हैं जिन्होंने असुरों का संहार किया।

क्षमा (क्षमा की देवी ) दयालुता की प्रतीक ,जो क्षमा का प्रतीक हैं।

शिवा (शिव की शक्तिरूपा) जो पवित्र और कल्याणकारी हैं, और भगवान शिव की अर्धांगिनी हैं।

धात्री (पालन -पोषण करने वाली) जो संपूर्ण सृष्टि का पालन-पोषण करती हैं।

स्वाहा (यज्ञ में देवताओं को दी जाने वाली आहुति का मंत्र) यज्ञ में दी जाने वाली आहुति की देवी।

स्वधा (पितरों को दी जाने वाली आहुति का मंत्र) जो पितरों का तर्पण करती हैं और उन्हें संतुष्ट करती हैं।

नमोऽस्तुते - आपको नमस्कार करता हूँ।

यह श्लोक देवी के विभिन्न रूपों को नमन करता है और उनकी शक्ति, करुणा, और सृष्टि की स्तुति करता है। इसमें देवी की आराधना और उनसे संरक्षण, आशीर्वाद और क्षमा की प्रार्थना की जाती है। देवी काली से लेकर मंगला और भद्रकाली तक, यह श्लोक देवी के विनाशकारी और सौम्य, दोनों रूपों को पूजता है।


नवार्ण मंत्र :-

 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै'


  – प्रणव मंत्र हैजो परम सत्य का प्रतिनिधित्व करता है  यह ब्रह्मांड की आद्य ध्वनि है

 ऐंयह माँ सरस्वती का बीज मंत्र है, जो ज्ञान, बुद्धि और विवेक का प्रतीक है।

 ह्रीं यह शक्ति और चेतना का प्रतीक है, जो भौतिक और आध्यात्मिक उन्नति का संतुलन बनाता है।

क्लींयह आकर्षण, प्रेम और सृजन की शक्ति का बीज मंत्र है।

चामुण्डायैचामुण्डा देवी का आह्वान, जो चंड और मुंड नामक दैत्यों का संहार करने वाली देवी हैं।

विच्चैयह मंत्र की शक्ति को संपन्न करता है और अवरोधों को काटने, नकारात्मकता को दूर करने का कार्य करता है।

यह मंत्र माँ दुर्गा की शक्ति, ज्ञान, और सुरक्षा के आह्वान का प्रतीक है। यह मंत्र अत्यंत शक्तिशाली है और इसे नियमित रूप से जाप करने से देवी का आशीर्वाद मिलता है, जो समस्त संकटों से रक्षा करती हैं और समृद्धि प्रदान करती हैं। यह इसका जप नकारात्मकता को दूर कर देवी की कृपा प्राप्त करने के लिए किया जाता है।

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